भारत से हम क्या सीखें लेखक परिचय बताएं?
Soln Date / Update:-21-Aug-2025 05:24PM
Solution:-
पूरा नाम: फ्रेड्रिक मैक्समूलर
जन्म: 6 दिसंबर, 1823 ईस्वी
जन्म स्थान: डेसाऊ नगर, जर्मनी
पिता का नाम: विल्हेल्म मूलर
जब मैक्समूलर की उम्र मात्र चार वर्ष थी, तभी उनके पिता का निधन हो गया। पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई, लेकिन इसके बावजूद उनकी पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आई।
बाल्यावस्था से ही वे संस्कृत के साथ-साथ ग्रीक और लैटिन भाषाओं में भी निपुण थे। वे लैटिन में कविताएँ भी लिखा करते थे।
18 वर्ष की उम्र में उन्होंने लिपजिग विश्वविद्यालय में संस्कृत का विधिवत अध्ययन आरंभ किया।
मैक्समूलर ने ‘हितोपदेश’ का जर्मन में अनुवाद प्रकाशित करवाया। इसी दौरान उन्होंने 'कठ' और 'केन' उपनिषदों का भी जर्मन भाषा में अनुवाद किया और ‘मेघदूत’ का पद्यानुवाद भी प्रस्तुत किया।
स्वामी विवेकानंद ने उन्हें “वेदांतियों का भी वेदांती” कहा था।
उनके गहन विद्वता से प्रभावित होकर इंग्लैंड की साम्राज्ञी विक्टोरिया ने उन्हें वर्ष 1868 में अपने ऑस्बोर्न महल में ऋग्वेद, संस्कृत और यूरोपीय भाषाओं की तुलनात्मक व्याख्या के लिए आमंत्रित किया।
विक्टोरिया भाषण से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्हें ‘नाइट’ की उपाधि देने का निर्णय लिया। लेकिन मैक्समूलर ने इसे बहुत साधारण समझते हुए स्वीकार नहीं किया।
निधन: 28 अक्टूबर, 1900 ईस्वी
इसका हिंदी भाषांतरण डॉ. भवानीशंकर त्रिवेदी ने किया है।
18 वर्ष की उम्र में उन्होंने लिपजिग विश्वविद्यालय में संस्कृत का विधिवत अध्ययन आरंभ किया।
मैक्समूलर ने ‘हितोपदेश’ का जर्मन में अनुवाद प्रकाशित करवाया। इसी दौरान उन्होंने 'कठ' और 'केन' उपनिषदों का भी जर्मन भाषा में अनुवाद किया और ‘मेघदूत’ का पद्यानुवाद भी प्रस्तुत किया।
स्वामी विवेकानंद ने उन्हें “वेदांतियों का भी वेदांती” कहा था।
उनके गहन विद्वता से प्रभावित होकर इंग्लैंड की साम्राज्ञी विक्टोरिया ने उन्हें वर्ष 1868 में अपने ऑस्बोर्न महल में ऋग्वेद, संस्कृत और यूरोपीय भाषाओं की तुलनात्मक व्याख्या के लिए आमंत्रित किया।
विक्टोरिया भाषण से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्हें ‘नाइट’ की उपाधि देने का निर्णय लिया। लेकिन मैक्समूलर ने इसे बहुत साधारण समझते हुए स्वीकार नहीं किया।
निधन: 28 अक्टूबर, 1900 ईस्वी
इसका हिंदी भाषांतरण डॉ. भवानीशंकर त्रिवेदी ने किया है।