जाति, भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं माना जा सकता है?
Soln Date / Update:-18-Aug-2025 05:39AM
Solution:-
उत्तर :- जातिप्रथा मनुष्य की रुचि और कार्य क्षमता को नजरअंदाज कर उसे आजीवन एक ही पेशे में बाँध देती है वह चाह कर भी अपने पेशे को बदल नहीं सकता है।