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Naubatakhaane Mein Ibaadat Subjective Question Answer Class-10

Soln Date / Update:-

25-Aug-2025 08:48PM

Solution:-

Q1. नौबतखाने में इबादत का लेखक परिचय लिखें?

पूरा नाम:- यतींद्र मिश्र,

जन्म:- 1977 ई० को

जन्म स्थान:- अयोध्या, उत्तर प्रदेश हुआ था।

उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ से हिंदी भाषा और साहित्य में एम०ए० किया। वे साहित्य, संगीत, नृत्य और चित्रकला के जिज्ञासु अध्येता है। वे रचनाकार के रूप में मूलतः एक कवि है। 

उन्हें केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी, नयी दिल्ली और सराय, नई दिल्ली की फेलोशिप भी मिली है।

 

Q2. बिस्मिल्ला खाँ का मतलब पाठ के आधार पर शहनाई वादक के रूप में बिस्मिल्ला खाँ का परिचय दीजिए।

उत्तर:- बिस्मिल्ला खाँ का मतलब होता है - बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई । बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। बिस्मिल्ला खाँ का तात्पर्य उनके हाथ से है, हाथ का तात्पर्य उनकी शहनाई से है, शहनाई का तात्पर्य फूंक से है फूँक का तात्पर्य सुरीली आवाज से है और यह सुरीली आवाज हमलोगों का मन मोह लेती है।

 

Q3. डुमराँव की महत्ता किस कारण से है?

उत्तर:- प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्म स्थान डुमराँव है। शहनाई बजाने के लिए जिस 'रीड या नरकट' का प्रयोग होता है वह रीड या नरकट डुमराँव के पास की नदियों के किनारे पाई जाती है। इस कारण डुमराँव की महत्ता है।

 

Q4. सुषिरवाद्य किन्हें कहते हैं। 'शहनाई' शब्द की व्युत्पत्ति किस प्रकार हुई है?

उत्तर:- जिस वाद्य यंत्र को फूंककर बजाया जाता है उसे सुषिर वाद्य कहते हैं। सुषिर वाद्य को 'शाह' की उपाधि दी गई और अरब देश में रीड या नरकट को 'नय' बोलते है । इस प्रकार इसका नाम 'शाहनय' पड़ा जो आगे चलकर 'शहनाई' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

 

Q5. बिस्मिल्ला खाँ किस बात के लिए सजदे में विनती करते थे? इससे उनके व्यक्तित्व का कौन-सा पक्ष उजागर होता है?

उत्तर:- बिस्मिल्ला खाँ नमाज के बाद सजदे में गिड़गिड़ाते थे- मेरे मालिक एक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आए ।
इससे पता चलता है कि बिस्मिल्ला खाँ को सांसारिक वस्तुओं से कोई लगाव नहीं था। इससे उनके जीवन चरित्र का पता चलता है।

 

Q6. पाठ के आधार पर यह बताइए कि बिस्मिल्ला खाँ का मुहर्रम पर्व से क्या संबंध था?

उत्तर:- बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई के साथ जिस मुस्लिम पर्व का नाम जुड़ा हुआ है, वह मुहर्रम है। मुहर्रम का महीना वह होता है जिसमें शिया मुसलमान हजरत इमाम हुसैन एवं उनके कुछ वंशजो के प्रति शोक मनाते हैं। पुरे दस दिनों का शोक होता है। वे बताते हैं कि उनके खानदान के कोई व्यक्ति मुहर्रम के दिनों में न तो शहनाई बजाता है और न किसी संगीत कार्यक्रम में भाग लेता है। उनकी आँखे इमाम हुसैन और उनके परिवार के लोगों की शहादत में नम रहती है।

 

Q7. बिस्मिल्ला खाँ जब काशी से बाहर कार्यक्रम प्रस्तुत करते थे, तो वे क्या किया करते थे? इससे हमें कौन-सी सीख मिलती है?

उत्तर:- बिस्मिला खाँ जब काशी से बाहर प्रदर्शन करते थे, तब विश्वनाथ एवं बालाजी मंदिर की दिशा की ओर मुँह करके बैठते थे। थोड़ी देर ही सही, मगर उसी ओर शहनाई का प्याला घुमा देते थे और भीतर की आस्था रीड के माध्यम से बजती थी ।इससे हमें सीख मिलती है कि मजहब हमें घृणा नहीं, प्रेम करना सीखाता है, मजहब किसी को बाँटता नहीं, उससे जुड़ना सीखाता है।

 

Q8. 'संगीतमय कचौड़ी' का आप क्या अर्थ समझते हैं?

उत्तर:- जब कुलसुम कलकलाते घी में कचौड़ी डालती थी तो उस समय छन्न की आवाज उठती थी। उस छन्न की आवाज में बिस्मिल्ला खाँ को संगीत के सारे आरोह-अवरोह दिखाई देते थे । इसलिए बिस्मिल्ला खाँ उसे संगीतमय कचौड़ी के नाम से जानते थे।

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