व्याख्या करेः हरष सोक तें रहै नियारो, नाहि मान अपमाना।
Soln Date / Update:-31-Aug-2025 05:41AM
Solution:-
उत्तर:- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी पात के काव्यखंड से राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा शीर्षक से लिया गया है। जिसके लेखक गुरु नानक जी है। वह इस पंक्ति के माध्यम से यह बताना चाहते है। की जो मनुष्य दुःख को दुःख नहीं समझता है। समय के अनुसार सुख, भोजन और सोने को मिट्टी के समान समझता है। वाही व्यक्ति भगवान को प्राप्त कर सकता है।वह सब कुछ त्यागकर राम नाम का जप करता है। उसे सांसारिक विषयों की कोई चिंता नहीं होती, जिससे उसके हृदय में भगवान का वास हो जाता है।
OR
प्रस्तुत पक्ति हमारे पाठ्य पुस्तक "गोधूली' भाग-2 काव्य (पद्य) खण्ड के "जो नर दुख में दुख नहिं माने पद से ली गयी है जिसके रचयिता "गुरु नानक" जी है। गुरु नानक ने गुरु उपदेश की महिमा का वर्णन करते हुए कहा है कि जिस पर गुरु उपदेशों का प्रभाव पड़ता है उस व्यक्ति को, सुख-दुःख, हर्ष-शोक इत्यादि सांसारिक बाधाएँ प्रभावित नहीं करतीं । इस प्रकार के व्यक्ति को मान-अपमान का भी प्रभाव नहीं पड़ता है।