Ram Nam Binu Birthe Jagi Janma ( राम नाम बिनु बिरथे जगि जन्मा ) Subjective Question Answer Class 10 BSEB Board
Soln Date / Update:-30-Aug-2025 07:57PM
Solution:-
Q1. लेखक किसके बिना जगत में यह जन्म व्यर्थ मानता है?
उत्तर:- कवि मानता है कि राम नाम के जप के बिना इस संसार में लिया गया जन्म निरर्थक है। जो व्यक्ति सच्चे मन से राम नाम का जप करता है, उसी के हृदय में सदा ईश्वर का वास होता है।
Q2. वाणी कब विष के समान बन जाती है?
उत्तर:- हमारी नजर में वाणी उस समय विष के समान हो जाती है। जब व्यक्ति राम नाम का जप छोड़ कर संसारिकता पर चर्चा करता है। तब वह उस समय विष खाता है। और विष ही उगलता है। उसी समय वाणी विष के समान हो जाती है।
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वाणी उस समय विष के समान हो जाती है, जब व्यक्ति राम-नाम की चर्चा या भजन न करके सांसारिकता की चर्चा करता है। तात्पर्य यह कि जब कोई व्यक्ति ईश्वर के नाम की महिमा का गुणगान न करके मति-भ्रमता के कारण पूजा-पाठ, कर्मकाण्ड या बाह्याडंबर में विश्वास करने लगता है। उसी समय वाणी विष के समान हो जाती है।
Q3. नाम-कीर्तन की तुलना में कवि किन कार्यों को निष्फल मानता है?
उत्तर:- हमारे गुरु नानक जी का कहना है। की नाम कीर्तन ही मनुष्य को इस दख में संसार से छुटकार दिलाता है। पूजा - पाठ आदि नहीं होता है। इस सांसारिक जीवन में राम नाम का जप करके भाव सागर को भी पार किया जा सकता है। यानी कवि राम नाम के बिना सभी कर्मो को व्यर्थ मानता है।
Q4. प्रथम पद के आधार पर बताइए कि कवि ने अपने युग में धर्म साधना के कौन-कौन से रूप देखे हैं?
उत्तर:- प्रथम पद के आधार पर कवि धर्म साधना के बारे में बताएं है। की प्राचीन काल में साधू लोग दंड, कमंडल धारण करते थे। तथा लम्बे लम्बे केस दाढ़ी रखते थे। उस समय ब्राह्मण में चमक दमक तथा दिखावा नहीं था।
Q5. हरिरस से कवि का अभिप्राय क्या है?
उत्तर:- हरिरस से कवि का यही अभिप्राय है। की राम नाम का जप करो जो व्यक्ति राम नाम का रस पी लिया है। उसके लिए संसार में कोई भी कठिनाईया नहीं है। वह हमेशा प्रकाश की दुनिया में मगन रहता है।
Q6. कवि के अनुसार ब्रह्मा का निवास स्थान कहाँ बताया गया है?
उत्तर:- कवि की दृष्टि में ब्रह्मा का निवास आत्मा में है। कवि का कहना है। की अगर व्यक्ति सच्चे दिल से परमपिता परमेश्वर को याद करता है। तो वह स्वयं उसनके साथ आ जाते है। तथा उसका आत्मा शांत हो जाता है। इसलिए कवि का कहना है। की ब्रह्मा का निवास आत्मा में ही है। वह जब चाहे प्रकट हो सकते है।
Q7. गुरु की कृपा से किसकी पहचान संभव हो जाती है?
उत्तर :- कवि का कहना है कि जिस व्यक्ति में ईश्वर का वास हो जाता है, वह सभी कठिनाइयों से मुक्त हो जाता है। ऐसा व्यक्ति सुख हो या दुःख, दोनों में सहजता से जीवन व्यतीत करता है और हर परिस्थिति का डटकर सामना कर लेता है।
उत्तर:- नानक के पद में वर्णित राम-नाम की महिमा आधुनिक जीवन में प्रासंगिक है। हरि-कीर्तन सरल मार्ग है जिसमें न अत्यधिक धन की आवश्यकता है. न ही कोई बाह्याडम्बर की। आज भगवत् नामरूपी रस का पान किया जाये तो जीवन में उल्लास, शांति, परमानन्द, सुख तथा ईश्वरीय अनुभूति को सरलता से प्राप्त किया जा सकता है।
Q9. व्याख्या करेः राम नाम बिनु अरुगी मरै।
उत्तर:- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी पात के काव्यखंड से राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा शीर्षक से लिया गया है। जिसके लेखक गुरु नानक जी है। वह इस पंक्ति के माध्यम से यह बताना चाहते है। की ईश्वर की प्रति प्रेम से होती है। जो व्यक्ति स्वर से सच्चे दिल से प्रेम करते है। वह संसार की जाल से मुक्त हो जाते है। तथा उनके जीवन में कोई भी परेशानिया नहीं आती है।
Q10. व्याख्या करेः कंचन माटी जानै।
उत्तर:- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी पात के काव्यखंड से राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा शीर्षक से लिया गया है। जिसके लेखक गुरु नानक जी है। वह इस पंक्ति के माध्यम से यह बताना चाहते है। की जो मनुष्य दुःख को दुःख नहीं समझता है। समय के अनुसार सुख, भोजन और सोने को मिट्टी के समान समझता है। वाही व्यक्ति भगवान को प्राप्त कर सकता है।वह सब कुछ त्यागकर राम नाम का जप करता है। उसे सांसारिक विषयों की कोई चिंता नहीं होती, जिससे उसके हृदय में भगवान का वास हो जाता है।
Q11. व्याख्या करेः हरष सोक तें रहै नियारो, नाहि मान अपमाना।
उत्तर:- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी पात के काव्यखंड से राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा शीर्षक से लिया गया है। जिसके लेखक गुरु नानक जी है। वह इस पंक्ति के माध्यम से यह बताना चाहते है। की जो मनुष्य दुःख को दुःख नहीं समझता है। समय के अनुसार सुख, भोजन और सोने को मिट्टी के समान समझता है। वाही व्यक्ति भगवान को प्राप्त कर सकता है।वह सब कुछ त्यागकर राम नाम का जप करता है। उसे सांसारिक विषयों की कोई चिंता नहीं होती, जिससे उसके हृदय में भगवान का वास हो जाता है।
Q12. व्याख्या करेः नानक लीन भयो गोबिंद सो ज्यो पानी संग पानी।
उत्तर:- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी के काव्यखंड से राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा शीर्षक से लिया गया है। जिसके लेखक गुरु नानक जी है। वह इस पंक्ति के माध्यम से यह बताना चाहते है। की व्यक्ति को भक्ति में ऐसा लीन हो जाना चाहिए। जिस प्रकार समुन्द्र अपनी मर्यादा के साथ रहता है। जैसे नदी जल का अस्तित्व समुन्द्र में मिल जाने से समाप्त हो जाता है। वैसे ही अब भक्त भी गोबिंद में मिल जाए। तो उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है।