वाणी कब विष के समान बन जाती है?
Soln Date / Update:-31-Aug-2025 05:08AM
Solution:-
उत्तर:- हमारी नजर में वाणी उस समय विष के समान हो जाती है। जब व्यक्ति राम नाम का जप छोड़ कर संसारिकता पर चर्चा करता है। तब वह उस समय विष खाता है। और विष ही उगलता है। उसी समय वाणी विष के समान हो जाती है।
OR
वाणी उस समय विष के समान हो जाती है, जब व्यक्ति राम-नाम की चर्चा या भजन न करके सांसारिकता की चर्चा करता है। तात्पर्य यह कि जब कोई व्यक्ति ईश्वर के नाम की महिमा का गुणगान न करके मति-भ्रमता के कारण पूजा-पाठ, कर्मकाण्ड या बाह्याडंबर में विश्वास करने लगता है। उसी समय वाणी विष के समान हो जाती है।